इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IOT) क्या हैं – What is Internet of Things in Hindi

आपको बता दे की इंटरनेट ऑफ थिंग्स क्या हैं? यह सवाल सिर्फ आपका ही नहीं बल्कि हर एक इंटरनेट यूजर का हैं जो इंटरनेट के बारे मे जानना चाहता हैं कई सारे लोग “इंटरनेट ऑफ थिंग्स” को IOT के नाम से भी जानते हैं जिसकी वजह से वे “IOT kya hai” “IOT full form” यह सवाल अक्सर पूछते रहते हैं, इसमे कोई भी शक नहीं की IOT को ही इंटरनेट ऑफ थिंग्स कहा जाता हैं।

इस बात को भी ध्यान मे रखिएगा की IOT का फूल फॉर्म Internet of Things ही हैं, इंटरनेट को तो आप जानते ही होंगे आज के समय मे इंटरनेट इतना विकसित हो चुका हैं की हम इंटरनेट मे ऑनलाइन पैसे कमा सकते हैं, इंटरनेट से ऑनलाइन पढ़ाई कर सकते हैं और इंटरनेट की मदद से हम अपना ऑनलाइन करिअर भी बना सकते है, लेकिन बहुत ही कम लोगों को इन सभी के बारे मे पता हैं।

इन्ही सभी Concepts मे से इंटरनेट ऑफ थिंग्स भी इंटरनेट का बहुत ही आवश्यक Concepts हैं जिसके बारे मे हर एक इंटरनेट यूजर को पता होना चाहिए, लेकिन दुख की बात तो यह हैं की इसके बारे मे भी बहुत ही कम ही इंटरनेट यूजर को पता हैं, लेकिन कोई बात नहीं इस लेख को पढ़कर आप Internet of things, के बारे मे विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

क्योंकि इस लेख की मदद से हमने इंटरनेट ऑफ थिंग्स यानी की IOT के बारे मे विस्तारपूर्ण जानकारी साझा की हैं, तो चलिए जानते हैं की इंटरनेट ऑफ थिंग्स क्या होता हैं (What is Internet of Things in Hindi) और कुछ नया सीखते हैं।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स क्या हैं – What is IOT in Hindi

IOT का पूरा नाम Internet of Things होता हैं, बहुत सारे लोग इंटरनेट ऑफ थिंग्स को लेकर अलग अलग चीजे सोच रहे होंगे, आपको यह बता दे की “हमारे दैनिक जीवन की सभी तरह की Physical चीजे को जो की उपयोगी हैं उनमे सॉफ्टवेयर, इलेक्ट्रॉनिक, सेन्सर जैसे चीजों को डालकर उन्हे इंटरनेट से कनेक्ट करना ताकि वह हमारे टाइप करे बिना वह डेटा को इकट्ठा कर सके और डेटा Receive कर सके, इस प्रक्रिया को इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IOT) कहा जाता हैं”

इसे आसान भाषा मे समझे तो ऐसे उपकरण जिनको को हम इंटरनेट से कनेक्ट कर के उसके डेटा को इंटरनेट की मदद से एक्सेस कर सकते हैं यह उपकरण इंटरनेट ऑफ थिंग्स कहलाते हैं, जैसे की एक कार को जब हम इंटरनेट की मदद से हम कनेक्ट कर लेते हैं तब हम उस कार मे Fuel meter, Speed, Location को ट्रैक कर सकते हैं, यही पूरी प्रक्रिया इंटरनेट ऑफ थिंग्स कहलाती हैं।

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इंटरनेट ऑफ थिंग्स का Concept

इंटरनेट ऑफ थिंग्स एक ऐसी System हैं जो Computing devices, Mechanical Machines और Digital Machines के साथ नेटवर्क की मदद से आपस मे Communicate कर के किसी भी Task को पूरा करने की क्षमता रखती हैं, किसी भी Device को एक दूसरे Devices के साथ मिलकर इंटरनेट के साथ जोड़ना यही इंटरनेट ऑफ थिंग्स का Concept हैं।

यह एक बहुत बड़ा नेटवर्क होता हैं जो की Multiple Devices को आपस मे जोड़ता हैं, वर्तमान मे उपलब्ध Devices जैसे Laptop, Smartwatch, Remote, LED, Microwave यह सब इंटरनेट और मालिक के साथ आपस मे कनेक्टेड होते हैं, जिसकी वजह से यह Devices मालिक के किसी भी Task को पूरा करने की क्षमता रखता हैं जैसे की Microwave आपके खाने को खुद ब खुद बड़ी आसानी से पका देते हैं।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स का इतिहास – History of IOT in hindi

इंटरनेट ऑफ थिंग्स यानी IOT का नामकरण एक प्रस्तुतीकरण के दौरान Kevin Ashton द्वारा 1999 मे किया गया था, लेकिन उससे भी पहले जब इंटरनेट की खोज की गई थी तब 1982 मे Carnegie mellon के रिसर्चर ने वेंडिंग मशीन को इंटरनेट से जोड़ा जो यह बताती थी की सोडा ठंडा हैं या नहीं।

उसके बाद 1990 मे पहली बार इंटरनेट के माध्यम से ब्रेड टोस्टर चलाया गया, जिसके बाद 2000 मे LG कंपनी ने स्मार्ट रेफ्रीजरेटर का परिचय दिया, फिर उसके बाद 2004 मे स्मार्टघड़ी का आविष्कार हुआ, जिसके कुछ सालों बाद 2007 मे Apple का स्मार्ट आईफोन मार्केट मे आई जिसके बाद 2009 मे बिना ड्राइवर वाली कार के बारे मे गूगल ने रिसर्च करना शुरू किया।

इतना सब होने के बाद 2011 मे स्मार्टटीवी मार्केट मे आई, जिसके कुछ ही वर्षों के बाद 2013 मे गूगल ने अपना गूगललेंस रिलीज किया और इतना सब होने के बाद 2015 मे Tesla कंपनी की कार Self Drive मोड के साथ आई जिसने IOT को और अधिक बढ़ावा दिया और जिस तरह IOT के मूल्य कम होते जा रहे हैं उसी तरह IOT की मांग और अधिक होती जा रही हैं और इससे अंदाजा लगा सकते हैं की IOT Device कितना Advance होते जा रहे हैं।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IOT) कैसे काम करता है?

किसी भी डिवाइस मे IOT को लगाने के लिए चार मुख्य Component होते हैं –

  1. Devices/sensors
  2. Connectivity
  3. Data processing
  4. User interface

1. Sensors : यह एक प्रकार के डिवाइस होते हैं, जो वातावरण से Physical इनपुट को माप सकता हैं और इसे डेटा मे कन्वर्ट कर सकता हैं, जिसे कंप्युटर आसानी से Read कर सके, उदाहरण के लिए – Sound, Temperature, Light, Level, Motion इत्यादि को सेंस करना।

यह सेंसर अक्सर Microprocessor के साथ Integrated होते हैं, ताकि वे डेटा को इकट्ठा करके उसे इंटरनेट के माध्यम से कहीं पर भी भेज सके।

2. Connectivity : IOT मे कई तरह के कम्यूनिकेशन Protocols और टेक्नोलॉजी को उपयोग मे लाया जाता हैं, Device rang, Power uses, Cost, data, weight इत्यादि चीजों के अनुसार ही एक सही और बेहतर Connectivity का चयन किया जाता हैं।

उदाहरण के लिए Bluetooth, WIFI, Mobile इत्यादि। यह सभी सेंसर्स डेटा को इंटरनेट के मदद से एक क्लाउड infrastructure मे भेजते हैं।

3. Data Processing : प्रोसेसिंग स्टेज मे कंप्युटर सेंसर के Raw data को इनफार्मेशन मे कन्वर्ट कर देते हैं जिससे हम समझ सके की यह परिवर्तन विभिन्न Data Manipulation तकनीक के माध्यम से किया जाता हैं इसमे एक काम तो यह हो सकता हैं की अलग अलग Devices के डेटा को इकट्ठा करना, जैसे की AC, घर की सभी लाइट व सभी तरह के आने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण।

यह Data प्रोसेसिंग थोड़ा कठिन भी हो सकता है जैसे वीडियो Feed मे से कर की नंबर प्लेट को Read करना, इस स्टेज मे हम Data Classification और Data को Analyst भी कर सकते हैं, ताकि हम उसमे से हम कुछ Parted ढूंढ सके हमारे Examination के लिए।

4. User Interface : कंप्युटर जो इनफार्मेशन को प्रोसेस करता हैं उसे हम अलग रूप मे देख सकते हैं जैसे की कोई भी Application जो Alerts भेज सकती हैं या हमें ईमेल, टेक्स्ट मैसेज के माध्यम से Notification भेज सकती हैं। एक Application के द्वारा हम Instruction वापिस भी भेज सकते हैं जैसे Temperature को Reset करना, मिट्टी के नमी के अनुसार उन्हे पानी देना इत्यादि।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स के उदाहरण (Exmples)

आज के समय मे लगभग हर एक क्षेत्र मे हमें इंटरनेट ऑफ थिंग्स देखने को मिलती हैं, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य इत्यादि क्षेत्रो मे हमें अधिकतर इंटरनेट ऑफ थिंग्स Concepts पर आधारित उपकरण देखने को मिलते हैं जो निम्नलिखित है –

Bio sensors/Wearable device

स्वास्थ्य के क्षेत्र मे हमें Bio sensors, Wearable device जैसे डिवाइस मौजूद हैं जो कभी भी और कहीं पर भी आपका Heart rate, Blood pressor इत्यादि चीजों को चेक कर सकते हैं एवं Automatic doctors को इसके बारे मे अलर्ट भी कर सकते हैं।

Soil & Water management

कृषि के क्षेत्र मे Moisture sensor और soil sensors जैसे उपकरण मौजूद हैं जिसकी मदद से हम फसल को कितना पानी चाहिए इसके बारे मे पता लगाकर पानी की बचत कर सकते हैं और मिट्टी की उपजाऊपन को संतुलित कर के रख सकते हैं।

Smart Identity card

शिक्षा के क्षेत्र मे हमें Smart Identity card आ चुके हैं जो अक्सर IT collages पर देखने को मिलते हैं, जो स्टूडेंट्स का Automatic Attendance लेते हैं और जैसे ही स्टूडेंट्स स्कूल या कॉलेज मे प्रवेश करते हैं या बाहर निकलते हैं तो यह Device Automatic उनके पेरेंट्स अलर्ट भेज देते हैं।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स के फायदे – Advantages of IOT in Hindi

इंटरनेट ऑफ थिंग्स की वजह से हमारे जीवन को कई तरह से लाभ हुआ हैं, व आपको यह बता दे की इंटरनेट ऑफ थिंग्स के अनेक फायदे हैं जो नीचे दिए गए हैं।

  • इंटरनेट ऑफ थिंग्स के कारण हमें काम मे Efforts कम लगते हैं व समय की भी बचत होती हैं।
  • आने वाले समय मे सभी तरह के काम Automation हो जाएगा, जिससे हम कई तरह के काम को एक जगह बैठ के कर सकते हैं।
  • इंटरनेट ऑफ थिंग्स की वजह से टेक्नोलॉजी और अधिक विकसित हो रही हैं, जैसे बिना ड्राइवर के कार आ रहे हैं।
  • इंटरनेट ऑफ थिंग्स के कारण हम सावधानी के साथ नैचुरल स्त्रोत का उपयोग कर सकेंगे जैसे की Moisture सेंसर के उपयोग से हम यह पता लगा पाएंगे की किसी पौधे को कितना पानी देना हैं।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स के नुकसान – Disadvantages of IOT in Hindi

जिस तरह मोबाइल टॉवर के फायदे भी हैं और नुकसान भी उसी तरह इंटरनेट ऑफ थिंग्स के फायदे तो हैं लेकिन कुछ नुकसान भी है जो नीचे दिए गए हैं।

  • इंटरनेट ऑफ थिंग्स मे गोपनीय डेटा को सुरक्षित रखना एक बड़ी समस्या हैं।
  • जब हम इंटरनेट ऑफ थिंग्स को बड़े उद्योग मे उपयोग मे लाते हैं तो इंटरनेट के द्वारा नेटवर्क अटैक होने की संभावना अधिक हैं क्योंकि इसमे आपका सभी तरह के गुप्त डेटा इंटरनेट पर भेजा जाता हैं।
  • सुरक्षा को बनाएं रखना भी बेहद ही मुश्किल हैं।
  • इंटरनेट ऑफ थिंग्स के उपकरणों को बनाने मे बहुत ही अधिक समय और पैसा लगता हैं।

FAQ’s – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

IoT का फूल फॉर्म क्या है?

IoT का फूल फॉर्म Internet of Things हैं।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स का फादर किसे कहा जाता है?

Kevin Ashton को इंटरनेट ऑफ थिंग्स का फादर कहा जाता हैं।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स की मदद से क्या Automation संभव है?

जी हाँ । इंटरनेट ऑफ थिंग्स की मदद से Automation संभव हैं। Tesla कंपनी की ऑटो पायलट वाली कारे इसका बेहतर उदाहरण हैं।

निष्कर्ष

अब उम्मीद हैं की आप सभी लोगों को इस लेख के माध्यम से दी गई जानकारी को पढ़कर आपने यह तो अवश्य जान लिया Internet Of things (IOT) क्या हैं? और यह सिख लिया होगा की इंटरनेट ऑफ थिंग्स कैसे काम करता हैं, अगर आपके मन मे इंटरनेट से संबंधित कोई भी सवाल हैं तो उसे नीचे कमेन्ट मे लिखकर अवश्य पूछे।

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