कंप्यूटर प्रोग्रामिंग क्या है (What is Programming in Hindi)

जैसे जैसे मोबाइल फोन के माध्यम से यूजर्स को इंटरनेट Easily उपलब्ध हो रहा है, जिसकी मदद से यूजर्स भी अब प्रोग्रामिंग के बारे मे जानना कहते हैं तभी तो रोजाना बहुत सारे लोग इंटरनेट की सहायता से सर्च इंजन मे “प्रोग्रामिंग क्या है” “कंप्युटर प्रोग्रामिंग क्या है” “प्रोग्रामिंग लैंग्वेज क्या होता है

कुछ इस तरह के सवाल सर्च कर रहे हैं ताकि उन्हे भी प्रोग्रामिंग भाषा क्या होता हैं? इसके बारे मे पता लग सके, इसी वजह से हमने प्रोग्रामिंग के बारे मे अत्यधिक रिसर्च करने के बाद इस पोस्ट को लिखने का चयन किया ताकि Readers तक प्रोग्रामिंग के बारे मे सही जानकारी पहुँच सके।

प्रोग्रामिंग कंप्युटर से Interact करने का एक जरिया होता हैं, यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण Mathematical Concept पर आधारित होता हैं। यह भी हिन्दी अंग्रेजी की तरह ही एक भाषा हैं लेकिन इसका उद्देश्य Humans के साथ communication करना नहीं हैं बल्कि इसका उद्देश्य कंप्युटर्स के साथ Interact करना होता हैं।

टेक्नोलॉजी Experts का यह मानना हैं की अगर कोई भी Individual Human टेक्नोलॉजी को समझना चाहता हैं तो उसके लिए कंप्युटर प्रोग्रामिंग के बारे मे जानना और उन्हे सीखना बेहद ही आवश्यक हैं तभी वह टेक्नोलॉजी कैसे काम करती हैं इसके बारे मे जान सकता हैं।

आज का यह पोस्ट पूरी तरह कंप्युटर प्रोग्रामिंग पर आधारित हैं जिसमे हमने कॉफी रिसर्च करके यह बताने की कोशिश की हैं की प्रोग्रामिंग क्या हैं (What is programming in Hindi) तो चलिए इस डिजिटल दुनिया के बारे मे जानते हैं और इस पोस्ट के माध्यम से कंप्युटर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के बारे मे कुछ नया सीखते हैं।

प्रोग्रामिंग क्या है – What is Programming in Hindi

प्रोग्रामिंग एक ऐसा प्रोसेस हैं जो की कुछ इस प्रकार का Instructions Create करता हैं, जिससे कंप्युटर्स समझते हैं और उसी के आधार पर Work करते हैं इसे आसान भाषा मे समझे तो प्रोग्रामिंग अलग अलग कंप्युटर के भाषाओ का एक ऐसा प्रोग्राम हैं जिसके माध्यम से कंप्युटर यह समझ पाते हैं की कंप्युटर को किस तरह काम करना हैं।

सामान्य बात हैं की कंप्युटर Humans की तरह हिन्दी, अंग्रेजी भाषाओ को समझकर कार्य नहीं कर सकते हैं इसीलिए Humans कंप्युटर प्रोग्रामिंग भाषा पर आधारित ऐसे Concepts तैयार करते हैं जिससे कंप्युटर यह समझने मे सक्षम हो पाते हैं की आखिर उन्हे किस तरह Work करना हैं इन्ही Concepts को हम प्रोग्रामिंग कहते हैं।

यह एक प्रकार का ऐसा Concept होता हैं जो की पूरी तरह से कंप्युटर के भाषाएं जिन्हे हम प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के नाम से जानते हैं उन पर आधारित होता हैं। अलग अलग तरह के कार्य को कंप्युटर से करवाने के लिए अलग प्रकार के प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के द्वारा विभिन्न प्रकार के Concepts तैयार किए जाते हैं जिसकी मदद से कंप्युटर को सटीकता से यह समझ मे आता हैं की उन्हे कैसा कार्य और किस तरह कार्य करना है।

आप अपने दैनिक जीवन मे इस्तेमाल करने वाले सभी तरह के ऐसे डिजिटल Products को जानते ही होंगे जो की एक प्रोग्रामिंग की मदद से ही बनाया गया हैं, जिसकी वजह से वे Products आपके मुताबिक कार्य करता हैं जैसे स्मार्ट टीवी, स्मार्ट फोन, एलईडी टीवी, स्मार्टवॉच यह सब प्रोग्रामिंग के उदारण हैं।

आपको कुछ महत्वपूर्ण बाते बता दे की आने वाला Future लगभग पूरी तरह प्रोग्रामिंग पर ही Based हैं और आप अभी जिस वेबसाइट मे यह आर्टिकल पढ़ रहे हैं यह भी प्रोग्रामिंग के माध्यम से ही बनी हैं।

प्रोग्रामिंग लैंग्वेज क्या होता है – What is Programming langauge in Hindi

जिस तरह Humans के अलग अलग प्रकार के languages होती हैं जिसकी मदद से वे Communicate कर पाते हैं और किसी अन्य Humans को कार्य करने के लिए Instructions दे पाते हैं कुछ उसी तरह कंप्युटर के साथ Interact करने के लिए इस्तेमाल मे ली जाने language को हम प्रोग्रामिंग लैंग्वेज कहते हैं।

यह एक प्रकार की ऐसी भाषा हैं जिसके द्वारा हम कंप्युटर के साथ interact करते हैं इसमे भी हिन्दी अंग्रेजी भाषाओ के जैसे ही Grammar’s होते हैं उन Grammars को हम Syntax, Commands के नाम से जानते हैं, एक कंप्युटर प्रोग्राम जैसे Android Apps, Websites, Software’s इत्यादि को बनाने के लिए हमें प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की आवश्यकता होती हैं।

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प्रोग्रामिंग लैंग्वेज कितने प्रकार के होते है (Types)

वैसे तो प्रोग्रामिंग लैंग्वेज विभिन्न प्रकार के मौजूद हैं जिनमे सभी का काम कंप्युटर को किसी Specific कार्य के Instructions देने के लिए किया जाता हैं लेकिन सभी प्रकार की प्रोग्रामिंग भाषाओ को उनके मुख्य कार्य के आधार पर Categorized किया गया हैं।

जिसके अनुसार प्रोग्रामिंग लैंग्वेज मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं, जो की निम्नलिखित हैं –

1. Low level Language (निम्न स्तर लैंग्वेज)

यह Low level Language खास तौर पर Machines के लिए होती हैं इसे आसानी से सीखा नहीं जा सकता क्योंकि यह समझने और पढ़ने मे बहुत ही Complex होती हैं, लगभग सभी तरह के Hardware machines मे इस Low level Language का उपयोग किया जाता हैं यह भी कुल दो प्रकार की होती हैं –

(i) Machine Language : यह कुछ इस तरह की Language होती हैं जो Direct कंप्युटर्स के CPU पर Run कर सकती हैं, व इसे मुख्य रूप से दो Digits 1 और 0 मे लिखे जाते हैं इन्हे सीखना बहुत ही अधिक कठिन होता, इसमे गलतीया अधिक होती हैं हैं व यह Portable नहीं होता हैं।

(ii) Assembly Language : यह लैंग्वेज Machine Language को आसान बनाने के लिए बनाया गया था, इसके आने से प्रोग्रामिंग करना थोड़ा बहुत आसान हो गया क्योंकि इसमे Machine language की तरह अधिक गलतीया नहीं होती थी व इसे digits मे नहीं लिखे जाते थे।

निम्न स्तर लैंग्वेज के फायदे

  • यह प्रोग्रामिंग लैंग्वेज बहुत ही तेजी से Execute होता हैं।
  • इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के द्वारा बनाए गए प्रोग्राम गति मे तेज होते हैं।
  • इसमे किसी भी तरह का Compiler या Interpreter की आवश्यकता नहीं होती हैं।
  • यह लैंग्वेज Hardware Device के साथ Direct Communicate करती हैं।

निम्न स्तर लैंग्वेज के नुकसान

  • इसमे बनाएं गए प्रोग्राम पूरी तरह Machine Dependent होते हैं यह बिल्कुल भी Portable नहीं होते हैं।
  • निम्न स्तर लैंग्वेज को develop करना बहुत ही कठिन हैं।
  • निम्न स्तर लैंग्वेज को आसानी से सिखा नहीं जा सकता हैं व इसे Maintain करना भी कठिन होता हैं।

2. High Level Language (उच्च स्तर लैंग्वेज)

यह बेहद ही प्रसिद्ध प्रोग्रामिंग लैंग्वेज हैं इन्हे सीखना समझना बहुत ही आसान होता हैं व ये लैंग्वेजेस् Portable होती हैं। इसके Statements अंग्रेजी भाषा की तरह होते हैं, यह लैंग्वेज जितना अधिक Humans के भाषा की तरह होती हैं उसे उतना ही उच्च स्तर का लैंग्वेज माना जाता हैं। यह लैंग्वेज भी दो प्रकार की होती हैं –

(i) Procedural Language : इसमे अगर कोई भी प्रोग्राम लिखना होता हैं तब Sequence Opsteps मे लिखा जाता हैं, इसमे Program को छोटे छोटे Parts मे विभाजित किया जाता हैं। इसमे ऊपर से नीचे ओर की Approach ली जाती हैं व Functions पर अधिक ध्यान होता हैं।

(ii) Object Oriented Language : यह लैंग्वेज असल दुनिया के objects पर Molded होते हैं व प्रोग्राम उनकी बीच का Interaction होता हैं, इसमे Bottom up Approach ली जाती हैं व इसमे डेटा पर अधिक focus किया जाता हैं।

वर्तमान मे इस्तेमाल मे लाई जाने वाली बेहद प्रसिद्ध प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेस् जैसे Python, PHP, JavaScript, CSS, HTML यह सब एक उच्च स्तर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के उदाहरण हैं।

उच्च स्तर लैंग्वेज के फायदे

  • उच्च स्तर लैंग्वेज इस्तेमाल करने मे बहुत ही साधारण होते हैं जिसकी वजह से इसे आसानी से सिख सकते हैं।
  • उच्च स्तर लैंग्वेज को आसानी से समझा जा सकता हैं।
  • उच्च स्तर लैंग्वेज को समझना निम्न स्तर लैंग्वेज के मुकाबले आसान हैं।
  • उच्च स्तर लैंग्वेज मे समय की कॉफी बचत होती हैं क्योंकि इसमे प्रोग्राम को सेव करके रख सकते हैं व यह लैंग्वेज Portable होते हैं।

उच्च स्तर लैंग्वेज के नुकसान

  • उच्च स्तर के लैंग्वेज निम्न स्तर लैंग्वेज के मुकाबले कम गति मे Execute होते हैं।
  • उच्च स्तर लैंग्वेज मे हमें अलग से हमें Compiler या Interpreter की आवश्यकता होती हैं।
  • उच्च स्तर लैंग्वेज मे Extra समय लगता हैं Source Code को Machine Code मे Translate करने मे समय लगता हैं।

FAQ’s (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

प्रोग्रामर किसे कहते है?

प्रोग्रामिंग भाषा की मदद से कंप्युटर से Interact कर के प्रोग्राम्स Create करने वाले को हम प्रोग्रामर कहते हैं।

कंप्युटर से किस भाषा से Interact किया जाता है?

प्रोग्रामिंग भाषा की मदद से कंप्युटर से Interact किया जाता हैं, कंप्युटर Binary Numbers को समझती हैं।

कौन सा प्रोग्रामिंग लैंग्वेज जल्दी Execute होती है?

निम्न स्तर की प्रोग्रामिंग लैंग्वेज जल्दी Execute होती हैं।

निष्कर्ष

अब मुझे इस लेख को आपके साथ साझा करते हुए यह उम्मीद हैं की आपने इस लेख को पूरा पढ़कर बहुत कुछ नया प्रोग्रामिंग के बारे मे सिखा होगा और यह जान लियाा होगा की प्रोग्रामिंग क्या हैं (What is programming in hindi) अगर अभी भी आपके मन मे इंटरनेट, सोशल मीडिया, टेक्नोलॉजी से संबंधित कोई भी सवाल हैं नीचे Comment मे जरूर पूछिए।

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