नैनो टेक्नोलॉजी क्या है (Nano Technology in Hindi)

अगर आप टेक्नोलॉजी के फील्ड मे इन्टरेस्ट रखते हैं तो आपने नैनो टेक्नोलॉजी का नाम तो अवश्य सुना होगा, जिसको सुनकर आपके मन मे यह सवाल अवश्य आया होगा की आखिर यह नैनो टेक्नोलॉजी क्या है? तो आपको बता दे की नैनो का मतलब सूक्ष्म होता हैं, इसे हम आसान भाषा और शुद्ध हिन्दी मे सूक्ष्म प्रौद्योगिकी भी कह सकते हैं।

यह पूर्ण रूप से सत्य है की टेक्नोलॉजी की वजह से ही हमारा जीवन इतना विकसित और सुविधाजनक हो पाया हैं। सभी अलग अलग क्षेत्रों मे अलग अलग प्रकार के टेक्नोलॉजी उपयोग मे लाए जाते हैं उदाहरण के लिए अगर हमें कंप्युटर के क्षेत्र मे आगे बढ़ना चाहते हैं तो इसके लिए हमें इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी के बारे मे जानने की आवश्यकता पड़ेगी।

टेक्नोलॉजी एक ऐसा शब्द हैं जो हमें अक्सर सुनने को मिलता हैं लेकिन अक्सर नैनो शब्द को सुनकर हमारे मन मे नैनोकार का ख्याल अवश्य आता होगा। इस कार को नैनोकार इसीलिए कहा जाता था क्योंकि इसका साइज़ छोटा था, कुछ इसी प्रकार नैनो टेक्नोलॉजी भी होती हैं जिसमे सभी तरह के नैनो साइज़ वाले पदार्थों पर काम किया जाता हैं।

पिछले कुछ लेख के माध्यम से हमने सम्पूर्ण जानकारी के साथ टेक्नोलॉजी क्या हैं और इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी क्या हैं ? हमने इसके बारे मे बात की लेकिन आज का यह लेख नैनो टेक्नोलॉजी पर Based हैं जिसमे हम नैनो टेक्नोलॉजी क्या हैं, नैनो टेक्नोलॉजी के उपयोग एवं नैनो से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी जानने वाले हैं।

नैनो टेक्नोलॉजी क्या हैं?

नैनो शब्द का मतलब सूक्ष्म होता हैं यानी की नैनो टेक्नोलॉजी एक ऐसी टेक्नोलॉजी हैं या एक ऐसा विज्ञान हैं जिसमे छोटे छोटे नैनो साइज़ वाले तत्वों को काम मे लिया जाता हैं, इसके तहत ऐसी संरचनाओ और अणुओ पर काम किया जाता हैं जिनका आकार 1 से लेकर 100 तक के नैनोमीटर Scale मे होते हैं, वर्तमान मे यह एक बेहद ही प्रसिद्ध टेक्नोलॉजी का Field हैं।

नैनो टेक्नोलॉजी मे तरह तरह के नैनो साइज़ वाली संरचनाओ पर तरह तरह के प्रयोग किया जाता हैं ताकि नैनो साइज़ वाले संरचनाओ और अणुओ पर काम करके कुछ नया Invent किया जा सके और किसी भी कार्य के छोटे छोटे अणुओ और संरचनाओ पर रिसर्च कर के उस कार्य को बेहतर और सुविधाजनक तरीके से किया जा सके यह एक प्रकार की बेहद ही उपयोगी टेक्नोलॉजी हैं।

परिभाषा

नैनो टेक्नोलॉजी ऐसी टेक्नोलॉजी हैं जिसमे किसी भी तरह के पदार्थों मे अणु या परमाणु के स्तर पर बदलाव कर के कुछ नया और सुविधाजनक Invention करने का प्रयत्न किया जाता हैं और अणु और परमाणु का आकार नैनो मे होने के कारण इसे नैनो टेक्नोलॉजी कहा जाता हैं।

इसका उपयोग लगभग हर एक क्षेत्र मे किया जाता हैं क्योंकि इस टेक्नोलॉजी मे नैनो साइज़ वाले अणुओ पर रिसर्च की जाती हैं जिससे किसी भी पदार्थ पर बारीकी से अध्ययन करना संभव हो पाता हैं व हर एक क्षेत्र मे नैनो नैनो टेक्नोलॉजी बेहद उपयोगी साबित हुई हैं क्योंकि इसमे ऐसे अणुओ पर काम किया जाता हैं जिसे इंसानी आँखों से नहीं देखा जा सकता हैं।

यह टेक्नोलॉजी हमारे दैनिक जीवन मे बेहद ही उपयोगी टेक्नोलॉजी के रूप मे उभरकर आ रही हैं क्योंकि हमारे आस पास की संरचना व हमारे शरीर की संरचना छोटे छोटे अणुओ से मिलकर ही बनी हैं। जिन अणुओ को इंसानी आँखों से देखना संभव नहीं हैं, इन अणुओ को सूक्ष्मदर्शी यंत्र की मदद से देखा जा सकता हैं और इन पर रिसर्च करके कॉफी कुछ नया Invent किया जा सकता हैं।

उदाहरण के लिए आपको बता दे की नैनो टेक्नोलॉजी की मदद से ऐसी ऐसी मशीने बनाया जा सकता हैं जो हमारे शरीर मे प्रवेश करके हमारे शरीर के किसी Particular Defective Area के हानिकारक Bacteria को खत्म करके शरीर को Heal किया जा सकता हैं।

नैनो टेक्नोलॉजी का इतिहास

नैनो टेक्नोलॉजी की सर्वप्रथम शुरुआत अमेरिका के एक भौतिक वैज्ञानिक जिनका नाम रिचर्ड फिनमेन था जिनके द्वारा एक मीटिंग के दौरान सन् 1959 मे की गई। इस मीटिंग मे उन्होंने नैनो टेक्नोलॉजी के Concept को लोगों के सामने लेकर आए, इसी वजह से रिचर्ड फिनमेन को आधुनिक नैनो टेक्नोलॉजी का जनक भी कहा जाता हैं।

इसके कुछ लगभग 15 सालों के बाद सर्वप्रथम जापान के एक वैज्ञानिक नोरिओ तनिगूची ने नैनो टेक्नोलॉजी शब्द का उपयोग कर इसे परिभाषित किया इनके अनुसार नैनो टेक्नोलॉजी मे एक अणु या परमाणु से बने पदार्थों का अलग होना और एक साथ आना इनमे बिखरने की प्रक्रिया शामिल होती हैं।

इन सब के बाद भारत मे नैनो टेक्नोलॉजी के जनक Chemist प्रोफेसर सी. एन. आर. राव को माना जाता हैं।

नैनो टेक्नोलॉजी के विभिन्न क्षेत्रो मे उपयोग

नैनो टेक्नोलॉजी एक ऐसी टेक्नोलॉजी हैं जो की लगभग सभी तरह के क्षेत्रों मे उपयोगी साबित होने वाली हैं क्योंकि इसमे जो रिसर्च की जाती हैं व नैनो साइज़ वाले अणु और परमाणुओ के स्तर पर की जाती हैं। नैनो टेक्नोलॉजी के मदद से कुछ क्षेत्रों मे विशेष परिवर्तन हो सकते हैं जो की निम्नलिखित हैं –

1. स्वास्थ्य के क्षेत्र मे

वर्तमान मे एक बेहतर स्वास्थ्य बहुत महत्वपूर्ण विषय हैं क्योंकि आज के समय मे तरह तरह के Inventions मौजूद हैं जो हमारे Body के किसी भी Area को damage कर देते हैं ऐसे मे नैनो टेक्नोलॉजी की मदद से Nano robots बनाया जा सकता हैं जो उस Particular Damaged Area मे जाकर उनमे मौजूद Bacteria को खत्म कर देगा जिससे Damaged Area फिर से ठीक हो जाएगा।

2. कृषि के क्षेत्र मे

नैनो टेक्नोलॉजी का योगदान कृषि के क्षेत्र मे बहुत ही महत्वपूर्ण रहने वाला हैं क्योंकि नैनो टेक्नोलॉजी की मदद से किसी पदार्थ के अणु और परमाणु के स्तर मे Changes कर के बेहद Effective खाद तैयार किए जा सकते हैं जिन खाद का उपयोग करके जमीन को उपजाऊ बनाकर फसल के पैदावार बढ़ाया जा सकता हैं।

3. इन्डस्ट्रीअल क्षेत्र मे

अक्सर इन्डस्ट्रीअल क्षेत्र मे मौजूद Factories मे केमिकल्स एवं तरह तरह के स्तर पर काम किया जाता हैं जिसके कारण Factories से बहुत ही जहरीले गैस निकलते हैं जो वातावरण को प्रदूषित कर लोगों के Health को खराब करता हैं।

ऐसे मे Factories मे इस्तेमाल किए जाने वाले पदार्थ के अणु और परमाणु के स्तर मे Changes कर के Factories से निकलने वाले जहरीले गैस को सामान्य गैस मे परिवर्तित किया जा सकता हैं जिससे वातावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सकता हैं। 4. इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र मे

नैनो टेक्नोलॉजी के फायदे

वर्तमान समय मे नैनो टेक्नोलॉजी के विभिन्न प्रकार एक फायदे हो रहे है एवं होने वाले है जो की निम्नलिखित है –

  • नैनो टेक्नोलॉजी की मदद से बैटरी, सोलर पैनल जैसे उपकरणों के साइज़ को छोटा कर उसे और अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता हैं।
  • नैनो टेक्नोलॉजी की मदद से स्वास्थ्य के क्षेत्र मे Nano robots बनाया जा सकता हैं और उस robot को Body के Bacteria वाले Area मे भेजकर Bacteria खत्म किया जा सकता हैं।
  • नैनो टेक्नोलॉजी की मदद से इलेक्ट्रॉनिक के उपकरण जैसे कंप्युटर, मोबाइल, बल्ब इत्यादि के स्क्रीन को और अधिक बेहतर किया जा सकता हैं।
  • नैनो टेक्नोलॉजी की मदद से बनाए गए उपकरण बाकी टेक्नोलॉजी से बनाएं गए उपकरण के तुलना मे कॉफी अधिक मजबूत और बेहतर Quality के होते है।

नैनो टेक्नोलॉजी के नुकसान

नैनो टेक्नोलॉजी के फायदे तो है ही लेकिन इसके कुछ नुकसान भी है जो की निम्नलिखित है –

  • नैनो टेक्नोलॉजी कॉफी ज्यादा Expensive हैं जिसकी वजह से इसके माध्यम से कुछ नया Create करने के लिए कॉफी अधिक लागत आएगी।
  • आप यह तो जानते होंगे की परमाणु हथियार कितने ज्यादा नुकसानदायक होते हैं नैनो टेक्नोलॉजी की मदद से इन परमाणु हथियारो को और अधिक नुकसान दायक बनाया जा सकता हैं।
  • नैनो टेक्नोलॉजी बहुत ही अधिक सूक्ष्म स्तर मे होने के कारण इसे समझने और अध्ययन करने मे बहुत ही बारीकी और अधिक समय की आवश्यकता होती हैं।

FAQ’s (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

नैनो टेक्नोलॉजी का जनक कौन हैं?

नैनो टेक्नोलॉजी का जनक अमरीकन वैज्ञानिक रिचर्ड फिनमेन को माना जाता हैं।

नैनो टेक्नोलॉजी का जिक्र सबसे पहले कब किया गया था?

नैनो टेक्नोलॉजी का जिक्र सबसे पहले 1959 मे एक मीटिंग के दौरान किया गया था।

भारत मे नैनो टेक्नोलॉजी का जनक किसे कहा जाता हैं?

भारत मे नैनो टेक्नोलॉजी का जनक Chemist प्रोफेसर सी. एन. आर. राव को कहा जाता हैं।

निष्कर्ष

उम्मीद हैं की अब आपने इस लेख को पढ़कर नैनो टेक्नोलॉजी के बारे मे बहुत कुछ सिखा होगा और यह जान लिया होगा की नैनो टेक्नोलॉजी क्या हैं (What is Nano technology in Hindi) अगर आपके मन मे इस लेख या इंटरनेट से संबंधित कोई भी सवाल हैं तो उसे Comment Box मे लिखना न भूले।

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